तुलेरा वंशावली का किया गया लोकार्पण

तुलेरा वंशावली का किया गया लोकार्पण

सलखन्यारी के ग्रामीणों ने किया आठ पीढ़ी की वंशावली का विमोचन

        बागेश्वर। गरूड़ से करीब 25 किमो. सूदूर प्रकृति के गोद में बसा गांव सलखन्यारी के ग्रामीणों ने आठ पीढ़ी की वंशावली का विमोचन किया। सलखन्यारी में ‘तुलेरा’ जाति निवास करती है। गांव के 22 वर्षीय युवा ललित तुलेरा ने यह वंशावली तैयार की है। उनको आठ पीढ़ी की वंशावली को बनाने में करीब पांच-छै साल का वक्त लगा। 

      ललित बताते बैं कि ‘तुलेरा’ क्षत्रिय हैं वर्ण में आते हैं और इनका गोत्र भारद्वाज है। ये कुमाउनी हैं। ‘बली बूबू’ को अपना अराध्य देव मानते हैं। बागेश्वर जिले का ‘सलखन्यारी’ गांव इन्होंने ने ही बसाया। वे यहां करीब दो सौ साल पहले चमोली जिले के ग्वालदम के पास वर्तमान ‘उलंग्रा’ गांव से आए थे। यहां वे कहां से आए इसका कोई प्रमाण नहीं। वे कहते हैं कि गांव के बुजुर्गों के अनुसार मुगल काल में बढ़ते अत्याचार से वे भी अन्य लोगों की तरह पश्चिम भारत से यहां आ गए थे। उनके बुजुर्ग बताते हैं कि चंद शासन काल में वे सामान तोलने का कार्य करते थे इसलिए उनको तुल्या्र ( स्थानीय कुमाउनी भाषा में) /तुलेरा कहते हैं। पर इस बात में कितनी सच्चाई है कहा नहीं जा सकता। सलखन्यारी में इनकी आठवीं पीढ़ी हाल ही में शुरू हुई है। 15 वर्ष की आयु से शुरू किया वंशावली निर्माण का काम- उन्होंने यह काम नवीं कक्षा में पढ़ने के दौरान करीब 15 वर्ष की आयु से शुरू कर दिया था। 

      वंशावली का कार्य उन्होंने 46 पेज में पूर्ण किया है। वंशावली का कार्य दो भागों में बांटा है। उनके बुजुर्गों का कहना है कि (सलखन्यारी) बागेश्वर व (उलंग्रा) चमोली जिले के अलावा अल्मोड़ा जिले के जलना के पास तुलेड़ी गांव के उनके बिरादर रहते हैं। यद्यपि उनके शोध में यह साबित नहीं हो सका कि तुलेड़ी के ‘तुलेड़ा’ उनके बिरादर हैं। ‘तुलेड़ी’ संबंधी जानकारी को उन्होंने भाग दो में रखा है। 

    प्रायः वंशावलिय में पुरूषों के नाम मिलते हैं और पुरूषों के नाम से ही वंशावली पूर्ण कर दिया जाता है। ललित ने इस वंशावली में पुरूषों के नाम के अलावा महिलाओं के नाम को भी शामिल किया है यानी पुत्रियों व पत्नियों के नाम भी इस वंशावली में शामिल हैं। इसके अलावा कुछ नक्शे व शीर्षकों की मदद से ‘तुलेरा’ के बारे में जानकारी दी गई है। 

    वे बताते हैं कि अभी कुछ कमियां व गलतियां इस वंशावली में रह गई हैं अगले संस्करण में गांव के अन्य लोगों की मदद से वंशावली को और भी विस्तार देंगे और नई जानकारी को इकट्ठा करेंगे। 

    उनका कहना है कि वे जाति प्रथा में रूचि नहीं रखते क्योंकि इस धरती पर मनुष्य को जाति, वर्ण, धर्म से बहुत कष्ट व दुख झेलने पड़े हैं। उनका उद्देश्य अपने वंश की ऐतिहासिक जानकारी को इक्ट्ठा कर सहेजने का है ताकि वे अपने पूर्वजों को याद कर सकें। वे कहते हैं कि तुलेरा जाति के बारे में बहुत अधिक जानकारी व वंशावली में अभी बहुत कार्य किए जाने की आवश्यकता है। 

        विमोचन कार्यक्रम में ग्राम प्रधान उलंग्रा (चमोली) से देव सिंह तुलेरा, हीरा सिंह परिहार, हरीश सिंह तुलेरा, श्याम सिंह तुलेरा, भगवत सिंह तुलेरा, ठाकुर सिंह तुलेरा, भजन सिंह तुलेरा, नेत्र सिंह तुलेरा, देवकी देवी, विमला देवी सहित गांव के बुजुर्ग, महिलाएं व बच्चे शामिल थे। 

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