त्यार ऐतै रूनी, उमर जाते रैं- उदय किरौला

त्यार ऐतै रूनी, उमर जाते रैं- उदय किरौला

उत्तराखंड के मित्रों के नाम चिट्ठी-

त्यार ऐतै रूनी, उमर जाते रैं

                     अल्माड़ 
             शनिवार, 6 नवंबर, 2021
              कार्तिक 21 पैट
सिद्धीश्री सर्वोपमा योग्यवर-6

        आमा-बूबू, ठुल बौज्यू-ठुलि ईजा, कका-काकी,ताऊ-ताई,ममा-मामी और सबै ठुला कैं मेरि पैला और ननां कै प्यार आशीष।     

         उत्तराखंड में चुनाव नजिकै छन। य वजैल ठुल-ठुल नेता क्ये न क्ये बहानल आज भोउ उत्तराखंड ऊण रयीं। भाजपा एक ठुल नेता तो आजि पांच साल और मौक दियो लै कै गयीं बल। प्रधानमंत्री ज्यू लै केदारनाथ बटी पुर उत्तराखंड लिजी आपुण भाषण कै गयीं। चुनाव नजिकै छन सबै नेता पहाड़ै जवानी और पहाड़ै पाणि कै रोकणा लिजी भाषण दिण रयीं। दुसार-तिसार पार्टी वाल लै आपुण धौकार फेरण रयीं।

          गौं बाखई पन जी रया जागि रया कूनै दीवाई त्यार लै हैगो। हमार उत्तराखंडा ठुल कवि शेरदा अनपढ़ै एक कविता छू- बखता त्येरि बलै ल्यूंल। बखत कतू बदलि जां। य हम सब लोग देखण रयूं। एक जमान छी। जब छिलुक जगै बेर दीवाई मनाई जांछी। वी बाद मुमबत्ती और आब बिजुली माउ घर-घर पुजि गे। दीवाई हू बत्ती जलाणा लिजी घरा तीलों तेल उखो में पिराई करि बे निकाई जांछी। लोग द्याप्ता थाना लिजी और दीवाई लिजी अणबिटाई तेल धरछी। आब सब इकमही हैरौ। घरौं पना जादेत्तर उखो यानी ऊखल तो आब चौल में नहां। पैली तो दैण, राड़ और तिल कमै हुणौ। क्वे घरौं में है लै गयो तो लोग बजार बटी मशीन में तेल पिरै बे ल्यूण रयीं। बग्वाई हूं च्यूड़ लै आब बजार बटी ल्यूणौ रिवाज हैगो। हमार गौंक सभापति ज्यू कूनी कि बग्वाई हूं पैली धान कुटि बे धानौ बुस में मट्टी तेल मिलै बे सारै खोई पटांगण में दूर दूर तक उज्याउ देखीछी। बग्वाई है पैली धान कुटि बे बूस जम करि बे दिवाई जगाई जांछी। दीवाई बखत धान कूटनै-कूटनै ब्वारियां हाथ छाउ पड़ि जांछी। आब लोग चाइनीज समान खरीदण रयीं। माटा दि और मुमबत्ती रिवाज लै कमै जै हैगो। जादेत्तर लोग बिजुली माउ खरीदि बे लगाण रयीं। बग्वाई में बम पटाखा पर अनाप-शनाप डबल खर्च करि बे लोग आपु कैं ठुल बताण चानीं। हमार गौंक सभापति ज्यू कूनी कि ठुल सोच वाल आदिम तब मानीं जांछी। जब गौं बाखई गरीबों बार में लै क्वे सोचों। गरीब नान तिना खुशी लै हमूकै देखण चैंछ।

         यदीवाई में जू और ताश खेलणौ रिवाज जादेत्तर जगा छू। पर आपुण पहाड़ में तो साल भर जू और ताश खुलेआम दुकानों में खेलणियां भीड़ जम हैजैं। दीवाई में जू और ताश खेलण आजि पैलियै जसै चलि रौ। हजारौं लाखौ रुपै दौ जुआरी आजि लै लगाण रयीं। शहर बजार पन लॉटरी खेल चलि रछी। आज भोउ सट्टा लगौणी नई-नई चाल चलि रै बल। बग्वाई हूं देश कोटूं बटी लोग आपुण घर ऐ रछी। आब सबै भाई बंद आपुण रुजगारा लिजी जाण गयीं। कूनी कि दिन मास तो उनै रूनी। हर साल नई त्यार आतै रूनी। बस उमर जानै रैं। जी रया जागि रया। यूं दिन मास भेटनें रया। कै च्यूड़ लै भाई बंदों तक पुजि हुनाल। दुरहाट में बग्वालीपोखर और ताकुला में पाटिया गौ में दीवाई दिन ठुल कौतिक है पड़ो।  

          सरकारल उत्तराखंड में कोरोना वंदिश खतम करि हालीं बल। कुछ लोग खुशि है रयीं। हमार गौंक सभापति ज्यू कूणी कि नेता लोगों रैली चलि रयीं। उनूकै जनता जनार्दनै क्ये चिंता नहां। उ तो आपुण रैली लिजी रस्त साफ करण रयीं। सभापति ज्यू कूणी कि पुलिस वालूं डरा वजैल मास्क पैरणा बजाय सब आपुण बचावा लिजी मास्क पैरिया। मास्क क्वे मजबूरी न बल्कि हमर आपुण बचावा लिजी जरूरी छी। कोरोना न्है लै जाल तब लै आपुण बचाव जरूरी छू। पहाड़ पन रतै-ब्याल ठंड बहुत बड़ि गो। बांकि फिर लेखूल। 

             तुमर मितुर
            उदय किरौला
           संपादक बालप्रहरी
        सचिव बालसाहित्य संस्थान
    दरबारीनगर,अल्मोड़ा,उत्तराखंड।
                  वेबसाइटः www.balprahri.com

लेखक
उदय किरौला ज्यूकि चिट्ठी-पत्री