त्यार बार को मौसम

त्यार बार को मौसम

त्यार बार को मौसम

      त्यार बार का टैम में बजार पन, बैंकों में, खूब भीड़भाड़ हुनी छ।खरीदारी, सामान खरिदन दिवाली का टैम पर दस्तूर ले भ्यो।कोरोना वायरस आजि खतम नैं है रयो, ऐतियात बरतन भौतै जरूरी छ।

        त्यार बार का बखत लोग उत्साह में फिजूलखर्ची ले करनी। महंगाई ले लोगनक बजट बिगाड़ी राखौ।दिवाली का टैम पर गिफ्ट, तोहफा दिना को चलन ले भयो मगर हमार समाज में भलि किताब खरीदना को, नान्तिनो कैं किताब भेंट करना को चलन न्हातिन। लोग अपन मकान का रंग रोगन, सजावट में लाखों रूपांया खर्च करि दिनी मगर द्वि चार सौ कि भलि किताब नै खरिदना।किताब पढ़ना को, पत्रिका पढ़ना को चलन नै हुना ले हमोर समाज बौद्धिक और मानसिक रूप ले कंगाल किसम को छ।भलि किताब हमन सही और गलत को फरक करना को विवेक दिंछीऔर हमन बौद्धिक मानसिक रूप ले मजबूती दिंछिन।

      भलो साहित्य, ठुला साहित्यकारों कि किताब, जीवनी, कहानी संग्रह, काव्य संग्रह हमन प्रेरणा ले दिंछी और तार्किक वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करन में ले मददगार हुंछिन। भलो साहित्य हमन संवेदनशील और जागरूक नागरिक बनना कि प्रेरणा दिंछ।मगर कोरोनाकाल में भौत ठुलि ठुलि हिंदी साहित्य कि पत्रिका ले बंद है गैछन या मुश्किल ले निकलन लागि रै छन।जब पाठक-गाहक लोग ह्वाला और किताबों कि, पत्रिकाओं कि खरीद होली तभै उनोर प्रकाशन ले लगातार है सक्छ।सरकार ले, सरकारी विज्ञापनों द्वारा अखबारों और पत्रिकाओं कैं मदद करनी चैंछी।हमार समाज में किताब, पत्रिका खरिदन ले एक विलासिता जसि मानी जांछी, जबकि लोग सुन चांदी, जेवर गहनपात और महंगा कपड़ों में खूब खर्च करनी। त्यार बार का टैम पर सामर्थवान लोगों ले गरीब छात्रों कैं, संघर्षशील ज्वानो कि मदद करनी चैंछी तभै लोगन को एक दुसारा में भरोसो ले बनी रौल।

***दिनेश भट्ट, सोर, पिथौरागढ़।****

लेखक
दिनेश भट्ट ज्यूकि फचैक