संविधान दिवसक महत्व- दिनेश भट्ट

संविधान दिवसक महत्व- दिनेश भट्ट

संविधान दिवसक महत्व

        हर साल छब्बीस नवंबर का दिन संविधान दिवस मनाई जां, ईस्कूलो और कालेजों में संविधान का निर्माताओं कैं याद करी जां और भारत का संविधान कि विशेषताओं कैं छात्रों कैं बताई जांछ।कैसै ले मुल्क को संचालन वीका संविधान का मुताबिक हुंछ।देश का नागरिकों खिन कानून व्यवस्था, वां कि अर्थ व्यवस्था, नागरिक अधिकार, और तमाम बातों को निर्धारण संविधान द्वारा हुंछ।छब्बीस नवंबर उनीस सौ उनपचास का दिन आजाद भारत को संविधान, संविधान सभा द्वारा बनाई बेर स्वीकार करि गो तभै ये दिन को महत्व छ।

       हमारा देश का भौत सारा कानून अंग्रेजों का बनाई छन और आजादी का है पैंली बठे बनी छन।खास कर पुलिस एक्ट।अंग्रेजों ले अपनि जरवत का मुताबिक कानून- नियम बनाई और एक गुलाम मुल्क में उनन लागू करौ।आजादी का बाद यो देखन में ऊंछ कि पुलिस और प्रशासन का ठुला अफसर अपन विशेषाधिकारों को इस्तेमाल करि बेर आम जनता कैं अंग्रेजों कि चारि हांकनी।आम जनता में ले अपन नागरिक अधिकारों कि जानकारी और जागरूकता न्हातिन। हमार देश कि आम जनता अपन अधिकारों और कर्तव्यों खिन जागरूक न्हातिन।हमार देश- प्रदेश का सरकारी दफ्तरों में, अफसरों में लोकतांत्रिक व्यवहार देखन में कम ऊंछ।अक्सर लोग सरकारी- सार्वजनिक स्थानों, सार्वजनिक संपत्ति को अनादर करनान्, यो ले कभै कभै देखन में ऊंछ कि जै ईस्कूल कालेज है पढ़ि बेर लोग निकली, जै दफ्तरों में बरसों तलक काम करौ, वां है हर किसम को फैद उठा, वीका प्रति अनादर, हिकारत को भाव देखूनी।वी ईस्कूल कालेज या विभाग कि बेहतरी, तरक्की का बार में के सोच उनन में नैं हुनी।आजादी जो हमन मिली रै वीका पछिल भौत त्याग बलिदान थ्यो, जो सपना-कल्पना स्वतंत्रता कि लड़ैं लड़नेर सेनानियों में थ्यो वी जज्बा कैं नयं पीढ़ी कैं हमेशा बताते रून चैंछ और उन मूल्यों कैं, उन बलिदानों कैं हमेशा याद करन् चैंछ और इज्जत दिन चैंछी।

      बाजारवाद, अति उपभोक्तावाद​और पूंजीवाद को विकृत रूप अच्यालन कि यूज एंड थ्रो संस्कृति, और तमाम लोकतांत्रिक संस्थाओं में काबिज जिम्मेदार लोगों को गैरजिम्मेदार और मौकापरस्त ब्यौहार ये गिरावट खिन जिम्मेदार छ।आम चुनावों में आम जनता का पास एक मौक ऊंछ, जै का द्वारा ऊ जिम्मेदार जन प्रतिनिधियों कैं चुनि बेर ठुला, जिम्मेदार पदों में पुजाओ।नागरिकों कैं लालच, जातिवाद क्षेत्रवाद में नैं पड़ि बेर अपन जिम्मेदारी समझते हुए सही लीडरशिप को चुनाव करन चैंछ।

-दिनेश भट्ट, सोर, पिथौरागढ़।

दिनेश भट्ट ज्यूकि फचैक