समय पर न जागा प्रशासन तो यह मोटर मार्ग किसी की जान लेकर ही मानेगा

समय पर न जागा प्रशासन तो यह मोटर मार्ग किसी की जान लेकर ही मानेगा

जानलेवा साबित हो सकता है बसौली-नाई-ढौल मोटर मार्ग में पुल का न बनना

नदी में फंसे वाहन को खींचता जेसीबी

      अल्मोड़ा, जनपद के बसौली से नाई-ढौल मोटर मार्ग पर बसौली के समीप विनसर नदी पर पुल न बना होने के कारण नाई, ढौल, किरड़ा, थपनिया, पोखरी, सुज्याली, वड्यूड़ा, गंगोलाकोटुली आदि गांवों के हजारों लोग जान जोखिम में डालकर यात्रा करने को विवश हैं।

बीच नदी में फंसी एंबुलेंस

      आज तो अंधेर ही हो गई, जब दोपहर में एक मरीज को जिला मुख्यालय ला रही एक एंबुलेंस बीच नदी में फंस गई। वह तो भला हो जेसीबी का, जिसके समय पर पहुंचने के कारण एंबुलेंस को नदी के बाहर निकाला गया और मरीज को आनन-फानन में जिला अस्पताल पहुंचाया गया, जिससे उसकी जान बच सकी। 

      ज्ञातव्य हो कि बसौली-नाई-ढौल मोटर मार्ग को बने सात साल हो गये हैं, लेकिन इसे प्रशासन की उदासीनता कहें या फिर राजनीतिक व ग्रामीण इच्छाशक्ति का अभाव, जो इतने बरस बीत जाने के बाद भी नदी में एक पुल का निर्माण नहीं हो पाया। 

नदी में फंसे यात्री वाहन को खींचता जेसीबी

       इस तरह नदी में वाहनों का फंसना और बहना यहाँ कोई नई बात नहीं है। इससे पूर्व भी सैकड़ों बार यहाँ नदी में वाहन फंस चुके हैं और कई बार नदी की धारा में बह भी चुके हैं। बरसात के दिनों में तो लोग नदी पार करने का साहस नहीं जुटा पाते और वाहनों को सड़क के किनारे ही खड़ा कर देते हैं। 

बरसात में नदी किनारे यूँ लग जाती है वाहनों की कतार

      नदी में वाहन के फंसने की स्थिति में लोगों को कभी-कभी तो दो-दो घंटे तक इंतजार करना पड़ता है, तब जाकर जेसीबी या किसी अन्य माध्यम से फंसे वाहन को खींचकर नदी से बाहर निकाला जाता है। यद्यपि पुल का कार्य नदी पर किया जा रहा है, लेकिन यह इतना धीमा है कि जिस रफ्तार से यह हो रहा है उसी रफ्तार में होता रहा तो, पुल निर्माण में कम-से-कम दो वर्ष का समय लग जायेगा, जिस कारण किसी भयानक दुर्घटना के घटित होने से इनकार नहीं किया जा सकता। 

जान जोखिम में डाल नदी पार करता बाइक सवार

    अतः प्रशासन को चाहिए कि वह नदी में पुल का निर्माण शीघ्रता से करवाये। नदी पर पुल का शीघ्र निर्माण न होना जानलेवा साबित हो सकता है। 

नदी में फंसा एक निजी वाहन
उत्तराखंड